कानूनी ईश्वर न्यायाधीश या पुलिस

लेखक-पत्रकार प्रकाश चंद गुप्ता हर जगह, हर समय पुलिस खुद को भगवान समझती है, उदाहरण अधिकतम है, अखबार भरा हुआ है लेकिन यह खबर अभी पूरी नहीं हुई है।पुलिस की भाषा नैतिक नहीं है, वे ऐसा दिखाते हैं मानो कानून या प्रशासन का उन पर कोई नियंत्रण नहीं है।यह बहुत दुखद है कि इसे नियंत्रित […]

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तैंतीस हजार करोड़ से भारत की आत्मनिर्भरता को गति, अंग्रेजी के कठिन शब्द क्यों होते हैं- अश्वनी वैष्णव

डॉ.अतुल कुमार नई दिल्ली। कैबिनेट फैसलों पर आयोजित प्रेस वार्ता में भव्य योजना के लिए अधिकृत की जाने वाली जमीनों पर अधिकारियों द्वारा एक कठिन शब्द का उपयोग किया गया जिसके उच्चारण में मंत्री जी को अच्छी खासी असुविधा हुई। उस वक्त उनके मुंह से यही निकला कि अंग्रेजी भाषा में कितने कठिन शब्द क्यों […]

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