क्या आरक्षण ही महिला सशक्तिकरण का असली मार्ग है?
जानें क्यों समाज की सोच और परवरिश में बदलाव कानून से ज्यादा जरूरी है। नई दिल्ली: भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में महिलाओं की भागीदारी हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रही है। डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा रचित संविधान ने महिलाओं को पहले दिन से ही बराबरी का हक दिया, लेकिन आज 21वीं सदी में भी हम ‘महिला आरक्षण विधेयक’ (33% आरक्षण) जैसे विधायी हस्तक्षेपों पर निर्भर हैं। यहाँ सवाल यह उठता…



