डिजिटल पत्रकारिता, सोशल मीडिया की जवाबदेही दिल्ली हाई कोर्ट सख्त; नियामक ढांचे की क्यों है सख्त जरूरत?

नई दिल्ली। क्या है हाई कोर्ट की बड़ी टिप्पणी? दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ कहा है कि आज के दौर में हाथ में मोबाइल और माइक लेकर कोई भी खुद को रिपोर्टर समझने लगा है। कोर्ट ने प्रेस की स्वतंत्रता को बरकरार रखते हुए डिजिटल और सोशल मीडिया के लिए एक संतुलित नियामक ढांचे (Regulatory […]

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अभिभावकों की बेरुखी और कमर्शियल स्कूलिंग: बच्चों के भविष्य से खिलवाड़

आज के आधुनिक दौर में बच्चों का बचपन दो पाटों के बीच पिस रहा है—एक तरफ वे माता-पिता हैं जिनके पास बच्चों के लिए समय नहीं है, और दूसरी तरफ वे कमर्शियल स्कूल हैं जिनका मकसद सिर्फ खानापूर्ति रह गया है। 1. समय की जगह सिर्फ पैसा: अभिभावकों की सबसे बड़ी भूल आजकल माता-पिता (Guardians) […]

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