अस्पताल का वेंटिलेटर, भारी-भरकम बिल और ‘लिविंग विल’: क्या बेसुध मरीज का लाइफ सपोर्ट हटाना सही या अपराध? जानिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला!

CRIME Healthcare NATIONAL
Advertisements
Advertisements

न्यूज़ डेस्क, राप्ती न्यूज़ (Prayagraj/Delhi):

क्या किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित इंसान को यह तय करने का हक होना चाहिए कि जब उसका शरीर जवाब दे दे, तो उसे जबरन वेंटिलेटर पर रखकर जिंदा न रखा जाए? क्या आईसीयू (ICU) के लाखों-करोड़ों के बिल से परिवारों को राहत मिल सकती है?

प्रायोजित

सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 (Article 21 – राइट टू लाइफ) के तहत ‘सम्मानपूर्वक मरने के अधिकार’ (Right to Die with Dignity) और ‘पैसिव इच्छामृत्यु’ (Passive Euthanasia) को लेकर बेहद आसान और व्यावहारिक दिशा-निर्देश तय किए हैं। अदालत ने ‘लिविंग विल’ (Living Will / Advance Medical Directive) और मेडिकल बोर्ड की प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया है।

राप्ती न्यूज़ की इस विशेष रिपोर्ट में जानिए— किसको, क्यों, कैसे मिलेगा फायदा और इसमें छिपे संभावित खतरे क्या हैं!

प्रायोजित

कौन, क्यों और कैसे? (Who, Why & How?)

  • कौन कर सकता है इस्तेमाल? (Who): कोई भी बालिग (18 वर्ष से अधिक आयु का व्यक्ति) जो स्वस्थ दिमाग से अपना निर्णय लेने में सक्षम हो, वह अपनी ‘लिविंग विल’ (Advance Directive) बनवा सकता है।
  • क्यों पड़ी जरूरत? (Why): अक्सर अस्पतालों में जब कोई मरीज ‘परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट’ (PVS) या किसी लाइलाज बीमारी के अंतिम चरण में पहुँच जाता है, तो परिवार भावनात्मक और वित्तीय रूप से टूट जाता है। वेंटिलेटर पर हफ्तों/महीनों तक शरीर को खींचे रखने से न मरीज को राहत मिलती है और न परिवार को।
  • कैसे काम करती है प्रक्रिया? (How):
    1. व्यक्ति पहले से लिखकर (नोटरी/गवाहों के समक्ष) रख सकता है कि यदि वह कभी होश खो दे और ठीक होने की गुंजाइश न रहे, तो उसे लाइफ सपोर्ट पर न रखा जाए।
    2. मरीज की हालत बिगड़ने पर अस्पताल का प्राइमरी मेडिकल बोर्ड और जिला मजिस्ट्रेट (DM) द्वारा गठित सेकेंडरी बोर्ड इसकी समीक्षा करते हैं। दोनों बोर्ड की सहमति के बाद ही लाइफ सपोर्ट हटाया जा सकता है।

लाभ और नुकसान (Profit & Loss Analysis)

आम जनता और परिवारों को लाभ (Profit):

  1. अनावश्यक वित्तीय बर्बादी से राहत: आईसीयू और वेंटिलेटर के नाम पर निजी अस्पतालों के लाखों रुपये के भारी-भरकम बिलों से परिवारों की जीवनभर की कमाई डूबने से बचेगी।
  2. मरीज को सम्मानजनक विदाई: मरीज को बिना वजह असहनीय शारीरिक पीड़ा और वेंटिलेटर की नालियों से मुक्ति मिलेगी।
  3. पैलिएटिव केयर (Palliative Care) का हक: कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि लाइफ सपोर्ट हटाने का मतलब मरीज को तड़पने छोड़ना नहीं है, बल्कि उसे दर्द निवारक दवाएं और सम्मानजनक देखभाल देना अनिवार्य है।

अस्पतालों और इंश्योरेंस सेक्टर पर असर (Loss/Impact):

  • निजी अस्पतालों का आईसीयू में मरीजों को अनिश्चितकाल तक रखकर अनुचित लाभ कमाने का तरीका बंद होगा।
  • स्वास्थ्य बीमा कंपनियों को मेडिकल बोर्ड की पारदर्शी रिपोर्ट मिलने से क्लेम सेटलमेंट में आसानी होगी।

संभावित अपराध और खतरे (Potential Crime & Misuse Risks)

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ एक बड़ा सवाल यह भी उठता है— क्या रिश्तेदार या दोस्त इसका गलत फायदा उठा सकते हैं?

  1. संपत्ति और वसीयत का लालच (Greed for Property):यदि मरीज के नाम बड़ी जायदाद है, तो स्वार्थी रिश्तेदार या फर्जी दोस्त झूठे दस्तावेजों या दबाव के जरिए जल्दबाजी में लाइफ सपोर्ट हटवाने की साजिश रच सकते हैं।
  2. देखभाल से बचने की नीयत:बुजुर्गों या गंभीर मरीजों के इलाज का खर्च और देखभाल की जिम्मेदारी से बचने के लिए परिवार के लोग जल्दबाज़ी में यह कदम उठाने का प्रयास कर सकते हैं।

कोर्ट का सुरक्षा चक्र: इन्हीं अपराधों और साजिशों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नियम बनाया है कि केवल एक डॉक्टर नहीं, बल्कि दो अलग-अलग मेडिकल बोर्ड (जिसमें सरकारी / स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल होंगे) मरीज की जांच करेंगे। जब तक दोनों बोर्ड पूरी तरह आश्वस्त नहीं हो जाते, लाइफ सपोर्ट नहीं हटाया जा सकता।

प्रायोजित

💬 राप्ती न्यूज़ का दृष्टिकोण (Editorial Stand):

“सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार जितना महत्वपूर्ण है, जीवन के अंतिम क्षणों में पीड़ा से मुक्ति और सम्मानपूर्वक विदाई पाना भी उतना ही बड़ा मानवीय अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट का यह कदम मेडिकल साइंस और मानवीय संवेदनाओं का बेहतर संतुलन है। हालांकि, कड़े मेडिकल ऑडिट से यह सुनिश्चित करना होगा कि इसका इस्तेमाल किसी की जिंदगी बचाने के बजाय उसे खत्म करने के हथियार के रूप में न हो।”


अगर आपको यह जानकारी महत्वपूर्ण लगी हो तो इसे अपने परिवार और दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें!

प्रायोजित

स्वास्थ्य, कानून और जनहित से जुड़ी हर निष्पक्ष खबर के लिए देखते रहिए Rapti News Today

  • Benefits of Paid Subscribers:- Early Notifications Highest Priority Support Free 100Gb Cloud Storage. and more.
    Benefits of Paid Subscribers:- Early Notifications Higher Priority Support Free 15Gb Cloud Storage.
    Applying discount code. Please wait...

Select a Payment Method

No payment methods are available for the selected subscription plan.

Follow Us:

Join Us:

प्रायोजित

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *