नई दिल्ली (वेब डेस्क):
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में हुई धांधली और पेपर लीक के खिलाफ राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर संघर्ष का मुख्य केंद्र बन गया है। 19, 20, 21 और 22 तारीख को देश के कोने-कोने से आए हजारों छात्रों और युवा संगठनों ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) व सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने सीधे तौर पर सवाल उठाया है कि आखिर करोड़ों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले पेपर लीक का असली जिम्मेदार कौन है?
1. 20 तारीख का आंदोलन: पुलिस बल प्रयोग और छात्राओं से बदसलूकी का आरोप
जंतर-मंतर पर 20 तारीख को हुए आंदोलन के दौरान स्थिति तब बेहद तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शन को रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने कड़ा रुख अपनाया:
- महिलाओं व छात्राओं के साथ अभद्रता: प्रदर्शन में शामिल छात्र-छात्राओं ने आरोप लगाया कि आंदोलन को दबाने और हटाने के दौरान सुरक्षाकर्मियों ने महिला अभ्यर्थियों के साथ धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार किया।
- प्रशासनिक जवाबदेही: आंदोलनकारियों का कहना है कि वे अपने लोकतांत्रिक अधिकार के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन सुरक्षा बलों ने उन पर अत्यधिक बल प्रयोग कर आवाज दबाने की कोशिश की।
2. पेपर लीक का जिम्मेदार कौन? आपराधिक मामलों (Criminal Cases) पर सवाल
- NTA और कोचिंग माफिया की मिलीभगत? छात्रों का आरोप है कि परीक्षा आयोजित कराने वाली संस्था NTA और पेपर बेचने वाले गिरोहों के बीच गहरा सांठगांठ है।
- कठोर कार्रवाई की मांग: सीबीआई (CBI) जांच के बावजूद छात्र सवाल उठा रहे हैं कि मुख्य साजिशकर्ताओं और बड़े अधिकारियों पर तत्काल सख्त आपराधिक धाराएं दर्ज कर उन्हें कड़ी सजा क्यों नहीं दी जा रही?
- सरकारी तंत्र पर सवाल: क्या तंत्र में बैठे लोग जानबूझकर दोषियों को बचा रहे हैं? मेधावी छात्रों के सपनों को तोड़कर भ्रष्टाचार को शह देने वालों पर कार्रवाई में देरी क्यों?
3. सरकारी कर्मचारियों के बच्चों की स्थिति और आंतरिक विरोध की मजबूरी
- क्या सरकारी अधिकारियों के बच्चों का सीधा चयन होता है? नियमों के अनुसार NEET परीक्षा में सभी के लिए समान मानक हैं, लेकिन आम जनता में यह आक्रोश है कि भ्रष्टाचार का फायदा साधन-संपन्न वर्ग आसानी से उठा लेता है।
- सरकारी कर्मचारियों का मौन विरोध: कई सरकारी कर्मचारी और अधिकारी भी इस अव्यवस्था से असहमत हैं, लेकिन Central Civil Services Conduct Rules (आचरण नियमों) के कारण वे खुलकर विरोध नहीं कर सकते। यदि वे सरकार के खिलाफ बोलेंगे तो उनकी नौकरी और सर्विस रिकॉर्ड (कुंडली) पर आंच आ सकती है।
4. क्या महात्मा गांधी का सत्याग्रह और परीक्षा बहिष्कार (Exam Boycott) सही रास्ता है?
छात्रों के बीच अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या उन्हें महात्मा गांधी के अहिंसक आंदोलन और परीक्षा बहिष्कार के फॉर्मूले को अपनाना चाहिए?
- सत्याग्रह का प्रभाव: गांधीवादी तरीके (असहयोग और शांतिपूर्ण धरना) से सरकार पर अभूतपूर्व नैतिक और अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया जा सकता है।
- परीक्षा बहिष्कार का जोखिम: हालांकि, परीक्षा के पूर्ण बहिष्कार से आम और गरीब छात्रों का कीमती वर्ष और अवसर बर्बाद होने का जोखिम रहता है।
- सही राह: विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा छोड़ने के बजाय शांतिपूर्ण सत्याग्रह, कानूनी लड़ाई (सुप्रीम कोर्ट) और ‘एंटी-पेपर लीक कानून’ को सख्ती से लागू करवाने के लिए लोकतांत्रिक दबाव बनाना ही सबसे सही मार्ग है।
प्रमुख मांगें:
- NEET मामले में शामिल सभी अपराधियों और भ्रष्ट अधिकारियों पर गैर-जमानती धाराओं में मुकदमा चले।
- जंतर-मंतर पर छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार करने वाले जिम्मेदार कर्मियों पर विभागीय कार्रवाई हो।
- परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और लीक-प्रूफ बनाया जाए।
सम्पादकीय टिप्पणी: देश का युवा अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर है। सरकार को दमनकारी नीतियों के बजाय पारदर्शी जांच और त्वरित कार्रवाई से युवाओं का विश्वास बहाल करना होगा।


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