विशेष पड़ताल: जंतर-मंतर का ‘विदेशी कनेक्शन’ और इस्तीफा… क्या मोदी सरकार के खिलाफ रची गई अंतरराष्ट्रीय पटकथा?

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ब्यूरो रिपोर्ट, राप्ती न्यूज़ (उत्तर प्रदेश)

नई दिल्ली / लखनऊ

राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर इस समय सिर्फ छात्रों के आक्रोश का मैदान नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति और भारत के सत्ता गलियारों के बीच एक बड़ा रहस्यमयी युद्धक्षेत्र बन चुका है। NEET धांधली और पेपर लीक के विरोध में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ छात्रों का दबाव था, या फिर पर्दे के पीछे से कोई और अदृश्य शक्ति भारत सरकार को घुटनों पर लाने का खेल रच रही थी?


1. अमेरिका, कनाडा और पश्चिमी देशों की अचानक ‘सक्रियता’: क्या है छुपा हुआ एजेंडा?

जंतर-मंतर पर जैसे ही आंदोलन ने जोर पकड़ा, पश्चिमी देशों, विदेशी हस्तियों और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रियाएं बाढ़ की तरह आने लगीं। हॉलीवुड अभिनेताओं से लेकर ब्रिटेन और कनाडा के कई सांसदों ने सोशल मीडिया पर भारतीय व्यवस्था और मोदी सरकार को घेरना शुरू कर दिया।

इतना ही नहीं, खुफिया एजेंसियों और सत्ताधारी बीजेपी के नेताओं ने जंतर-मंतर पर कुछ संदिग्ध विदेशी नागरिकों की मौजूदगी का दावा कर ‘विदेशी फंडिंग’ (Foreign Funding) और ‘डीप स्टेट’ (Deep State) की साजिश की तरफ इशारा कर दिया है। क्या अमेरिका और पश्चिमी देश छात्रों की आड़ में भारत सरकार से कोई बड़ा राजनीतिक या आर्थिक समझौता (Point/Deal) मनवाना चाहते हैं?


2. धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: क्या दबाव में झुकी सरकार, या यह आरएसएस (RSS) की चाल?

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भले ही छात्रों की बड़ी जीत माना जा रहा है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे इतनी सादगी से नहीं देख रहे हैं।

  • क्या बैकफुट पर आई सरकार? सरकार और बीजेपी लगातार यह संदेश दे रही थी कि वे उपद्रवियों के सामने नहीं झुकेंगे। लेकिन अचानक इस्तीफा होना यह दर्शाता है कि अंदरूनी स्तर पर नुकसान को रोकने के लिए कोई बड़ा रणनीतिक फैसला लिया गया है।
  • संघ और मोहन भागवत का रुख: सूत्रों की मानें तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और सरसंघचालक मोहन भागवत भी देश के युवाओं में बढ़ते असंतोष को लेकर गंभीर थे। चुनावी और वैचारिक मोर्चे पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने के लिए संघ प्रमुख और शीर्ष नेतृत्व ने सरकार को छवि सुधारने और सख्त कदम उठाने के स्पष्ट संकेत दिए थे।

3. जंतर-मंतर से ‘पीछे न हटने’ का सस्पेंस: आखिर चाहते क्या हैं मास्टरमाइंड?

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मुख्य मांग पूरी होने के बाद भी जंतर-मंतर से आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आंदोलनकारी छात्र संगठन नई मांगों के साथ डटे हुए हैं।

यहाँ से असली सस्पेंस शुरू होता है:

“अगर मुख्य चेहरा हटा दिया गया, तो फिर यह आंदोलन किसके इशारे पर आगे खींचा जा रहा है? क्या अंतरराष्ट्रीय ताकतें और भारत विरोधी लॉबी भारत की आंतरिक शांति को अस्थिर रखकर NDA सरकार और पीएम मोदी की वैश्विक छवि पर प्रहार करना चाहती हैं?”


राप्ती न्यूज़ की अंतिम राय

शिक्षा व्यवस्था की नीव सुधारना और युवाओं को न्याय देना सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। लेकिन छात्रों के निष्पक्ष आंदोलन में जिस तरह से अंतरराष्ट्रीय दखल, विदेशी फंडिंग के आरोप और बड़े राजनीतिक मोहरे फिट किए जा रहे हैं, उसने दिल्ली के सियासी गलियारे में हड़कंप मचा दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस अंतरराष्ट्रीय और आंतरिक चक्रव्यूह को कैसे भेदती है।

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